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बिना सोचे समझे हरियाणा सरकार के जनविरोधी निणर्यों की फिर खुल गई पोल: कैप्टेन अजय सिंह यादव

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार के नोटिफिकेशन को किया खारिज

गुरूग्राम,  हरियाणा सरकार के बिना सोचे समझे और जनविरोधी निणर्यों की पोल एक बार फिर खुल गई, जिसमें मान्नीय सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार के नोटिफिकेशन को खारिज कर बडा निर्देश देते हुए कहा कि कोई भी राज्य सिर्फ आर्थिक आधार पर क्रीमीलेयर तय नहीं कर सकता है और माननीय कोर्ट ने हरियाणा सरकार के नोटिफिकेशन को खारिज कर दिया है। उक्त जानकारी देते हुए पूर्व मंत्री कैप्टेन अजय सिंह यादव ने बताया कि ओबीसी वर्ग को कॉलेज, नौकरी और प्रमोशन में 27 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई है। लेकिन 17 अगस्त 2016 को हरियाणा सरकार ने क्रीमीलेयर को लेकर एक नोटिफिकेशन जारी किया था। जिसके तहत ओबीसी में छह लाख तक की सालाना आमदनी वाले शख्स को नॉन क्रीमीलेयर के तहत माना गया था, मतलब छह लाख से ज्यादा आमदनी वाले को रिजर्वेशन से वंचित किया गया था साथ ही, छह लाख तक की आमदनी में भी सब क्लासिफिकेशन किया गया था, इसमें तीन लाख तक की कमाई वालों को ही एडमिशन से लेकर नौकरी तक में प्राथमिकता देने की बात कही गई थी।
यादव ने बताया कि जिसके बाद हरियाणा पिछडा वर्ग कल्याण महासभा और अन्य ने हरियाणा सरकार के इस नोटिफिकेशन को चुनौती दी थी। इसी के चलते माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त 2021 मंगलवार को रिजर्वेशन में क्रीमीलेयर को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया। कोर्ट ने हरियाणा सरकार के 17 अगस्त 2016 के नोटिफिकेशन को खारिज कर दिया, जस्टिस एल नागेश्वर राव की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि 17 अगस्त 2016 के नोटिफिकेशन के तहत राज्य सरकार ने सिर्फ आर्थिक आधार पर क्रीमीलेयर तय किया था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि राज्यों को ओबीसी में क्रीमीलेयर के लिए सब क्लासिफिकेशन का अधिकार नहीं है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि राज्य ओबीसी में क्रीमीलेयर सिर्फ आर्थिक आधार पर तय नहीं कर सकता। यह नोटिफिकेशन इंदिरा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिए फैसले के खिलाफ  है। इंदिरा साहनी जजमेंट में कहा गया था कि आर्थिक, सामाजिक और अन्य आधार पर क्रीमीलेयर तय होगा।
कैप्टेन अजय सिंह ने मांग करी है कि हरियाणा सरकार को अब तुरंत प्रभाव से सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करके लोगों को राहत देनी चाहिए। ताकि केद्र की ओबीसी तथा हरियाणा की बीसी नियमावली पुन: एक जैसी हो सके और इससे पिछडे वर्ग को उनके आरक्षण की पूरा लाभ मिलेगा। विधायक चिरंजीव राव ने तकनीकी खामियों को दूर करवाने के लिए माननीय न्यायालय में लडी गई लडाई में साथ देने वाले सभी संगठनों तथा समाजिक कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया है।
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