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13 की हेलीकॉप्टर क्रैश में मौत: CDS बिपिन रावत का निधन, हेलिकॉप्टर क्रैश में पत्नी मधुलिका समेत 13 लोगों की मौत

तमिलनाडु में आर्मी हेलकॉप्टर हादसे में देश के पहले CDS बिपिन रावत शहीद हो गए हैं। बता दें कि सेना का हेलीकॉप्टर IAF MI-17 V5 बुधवार दोपहर क्रैश हो गया था। इस हेलीकॉप्टर में देश के पहले सीडीएस विपिन रावत समेत 14 लोग मौजूद थे।

सूत्रों के मुताबिक इस हेलीकॉप्टर हादसे में सीडीएस रावत की पत्नी मधुलिका रावत का भी देहांत हो गया है। इस हादसे में सभी चौदह सवारों की मौत हो गई है। भारतीय वायुसेना ने इस क्षति की पुष्टि कर दी है।

हेलिकॉप्टर में ये लोग सवार थे

1. जनरल बिपिन रावत

2. मधुलिका रावत

3. ब्रिगेडियर एलएस लिद्दर

4. लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह

5. नायक गुरसेवक सिंह

6. नायक जितेंद्र कुमार

7. लांस नायक विवेक कुमार

8. लांंस नायक बी. साई तेजा

9. हवलदार सतपाल

(इसके अलावा 5 और लोगों के नाम सामने आने बाकी हैं)

रावत का हेलिकॉप्टर पहले भी क्रैश हुआ था, बच गए थे
जनरल बिपिन रावत एक बार पहले भी हेलिकॉप्टर हादसे का शिकार हो चुके हैं। 3 फरवरी 2015 को उनका चीता हेलिकॉप्टर नगालैंड के दीमापुर में क्रैश हुआ था। तब बिपिन रावत लेफ्टिनेंट जनरल थे।

पिछले महीने भी क्रैश हुआ था Mi-17, सभी 12 सवार मारे गए थे
एक महीने के अंदर देश में दूसरा Mi-17 हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ है। पिछला चॉपर 19 नवंबर को अरुणाचल प्रदेश में क्रैश हुआ था। उस घटना में चॉपर में सवार सभी 12 लोग मारे गए थे।

कुछ ऐसा था जीवन सफ़र- बिपिन रावत ने सेना से दिसंबर-1978 में जुड़े। सेना को अपनी सेवाएं देने के दौरान बिपिन रावत अनेक पदों पर रहे। इंडियन मिलिट्री एकेडमी, देहरादून में भी उनकी तैनाती रही। रावत मिलिट्री ऑपरेशंस डायरेक्टोरेट में वे जनरल स्टाफ ऑफिसर ग्रेड 2 रहे। लॉजिस्टिक स्टाफ ऑफिसर, कर्नल मिलिट्री सेक्रेटरी, डिप्यूटी मिलिट्री सेक्रेटरी, जूनियर कमांड विंग में सीनियर इंस्ट्रक्टर जैसे कई पदों पर वह सेना में रहे।

ऊंची चोटियों की लड़ाई में बिपिन रावत को महाराथ हासिल थी और दुर्दांत इलाकों में उन्होंने आतंकवाद व उग्रवादी गतिविधियों से निपटने के लिए कई ऑपरेशन चलाए। बिपिन रावत को काउंटर इंसर्जेंसी का विशेषज्ञ माना जाता था। नॉर्थ ईस्ट में चीन से सटे लाइन ऑफ एक्चुएल कंट्रोल पर उन्होंने एक इंफैंट्री बटालियन को कमांड किया। वहीं, कश्मीर घाटी में राष्ट्रीय राइफल्स और इंफैंट्री डिवीजन के वे कमांडिंग ऑफिसर रहे। 2008 में कांगो में उन्होंने यूएन पीसकीपिंग ऑपरेशन में इंडियन ब्रिगेड के चीफ की ज़िम्मेदारी संभाली। अपने अदम्य साहस के लिए रावत को 40 साल से अधिक के सैन्य करियर में कई सेवा मेडल और अवार्ड मिले हैं। यूनाइटेड नेशंस के साथ काम करते हुए भी उनको दो बार फोर्स कमांडर कमेंडेशन का अवार्ड दिया गया।

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