ढह गया रागनी का चर्चित स्तंभ
जिले के गांव लिसान निवासी जाने-माने लोक गायक एवं कवि महाशय भीमसिंह नहीं रहे। वे 77 वर्ष के थे तथा पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। उनका अंतिम संस्कार आज उनके गांव में किया गया, जहां ग्रामीणों के अलावा क्षेत्र के संस्कृतिप्रेमियों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। उनके बड़े पुत्र शेर सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी। उक्त जानकारी लिसान गांव की कवि दलबीर ‘फूल’ ने दी। उन्होंने कहा कि उनके निधन से दक्षिणी हरियाणा में रागनी का एक प्रमुख स्तंभ ढह गया।

उल्लेखनीय है कि महाशय भीम सिंह आकाशवाणी के अनुबंधित रागनी गायक थे। उन्होंने करीब तीन दर्जन हरियाणवी किस्सों को रागनियों में कलमबद्ध कर अपना स्वर दिया था। इतना ही नहीं, वे दक्षिणी हरियाणा में होली गायन के पुरोधाओं में जाने जाते रहे। पिछले दिनों ही हरियाणा ग्रंथ अकादमी ने उनकी समग्र रचनाधर्मिता को महाशय भीमसिंह ग्रंथावली के रूप में प्रकाशित करने का निर्णय लिया है,जिसका संपादन साहित्यकार सत्यवीर नाहड़िया ने किया है।
बाबू बालमुकुंद गुप्त पत्रकारिता एवं साहित्य संरक्षण परिषद् के तत्वावधान में गुड़ियानी में आयोजित एक कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने उनकी ऑडियो एल्बम कीचक वध का लोकार्पण किया था तथा हरियाणा साहित्य अकादमी ने उनके द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता का हरियाणवी रागनियों में किए गए अनुवाद ‘गीत्तां म्हं गीता’ को प्रकाशानुदान देकर अलंकृत किया था। उनकी आशुकाव्य प्रतिभा के चलते वे लोक मंचों पर वर्षों तक छाए रहे। क्षेत्र के विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े रचनाकारों एवं कलाकारों ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताते हुए शोक जताया है।




