
धारुहेड़ा चेयरमैन चुनाव में माननीय हाईकोर्ट केस प्रकरण में सभी प्रत्याशी ने मिलकर ग़लत फ़ैसले के ख़िलाफ़ विरोध जताते हुए कहा की जाँच रिपोर्ट में सब कुछ फ़र्ज़ी होते हुए भी कोर्ट ने दूसरे पक्ष को सुने बिना कैसे ये एकतरफ़ा फ़ैसला चुनाव के बीच में सुना दिया। छ भूल ज़रूर हुआ है। इसमें धारुहेड़ा की आमजनता और उम्मीदवारों का क्या दोष है जोकी चुनाव से एक दिन पहले चुनाव रद कर दिया जाता है अब सभी का दायित्व बनता है की मिलकर ग़लत के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाये।
क्योंकि जो इंसान लगातार अपने बयान बदल रहा है जो कभी बोलता है है की मैं कोर्ट जाके धारूहेड़ा का नुक़सान नहीं करूँगा फिर चुनाव के बीच में चुपके से कोर्ट जाके अपनी बातों से पलट गया। और अयोग्य होते हुए भी लगातार जनता के बीच जूठ और पाखंड करके सबकी आँखो में धूल झोकने का काम कर रहा है, ऐसा प्रत्याशी धारूहेड़ा नगर पालिका में बैठकर धारूहेड़ा का कितना नुक़सान करेगा, ये सोचने वाली बात है।
ये धारुहेड़ा की आमजनता और सभी चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के साथ अन्याय है।




