
धारुहेड़ा नगर पालिका चुनाव में फिर एक बार पासा पलटता नज़र आ रहा है। कोर्ट से सबूतों के अभाव में फ़ैसला कंवर सिंह के पक्ष में आने से जहां उनका रास्ता साफ़ नज़र आ रहा था लेकिन फिर से संदीप बोहरा ने RTI से लिए सबूतों के आधार पर कंवर सिंह की शैक्षणिक योग्यता पर फिर से सवाल खड़ा कर दिया है। संदीप बोहरा ने RTI के माध्यम से प्राप्त सूचना के अनुसार नगर पालिका धारूहेड़ा के पहले आम चुनाव, सन 2008 में हुए थे और उस चुनाव मे कंवरसिंह ने वार्ड नम्बर 7 से पार्षद के चुनाव हेतु नामांकन किया था, जिसमे उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता में खुद को अनपढ़ घोषित किया था। और उस आम चुनाव में कंवर सिंह की हार हुई थी और उनकी ज़मानत भी जप्त हुई थी। तो अब सवाल ये उठता है की जो व्यक्ति सन 2008 में अनपढ़ था तो फिर सन 2020 में वो मट्रिक पास कैसे हो गया, वो भी सन 1981 में? ना कोई स्कूल का नाम है। ना कभी दा सेंट्रल बोर्ड आफ हाईअर एजुकेशन को ऐसे कोई दसवी के इग्ज़ैम करवाने की कोई मान्यता थी। ये सिर्फ़ एक सोसायटी थी। जन्म, दिनांक में भी सं
दीप बोहरा ने सवाल किया की वो भी दो कैसे हो सकती है? साथ ही साथ सवाल किया गया है की बिना एक से नौवी पास के सीधे कैसे कोई दसवी कर सकता है। अगर कंवर सिंह के पास दसवी से पहले की कोई सर्टिफ़िकेट है तो उन्हें पेश करना चाहिए ताकि सत्य सामने आए।
दीप बोहरा ने सवाल किया की वो भी दो कैसे हो सकती है? साथ ही साथ सवाल किया गया है की बिना एक से नौवी पास के सीधे कैसे कोई दसवी कर सकता है। अगर कंवर सिंह के पास दसवी से पहले की कोई सर्टिफ़िकेट है तो उन्हें पेश करना चाहिए ताकि सत्य सामने आए।संदीप बोहरा ने कहा की उनकी लड़ाई व्यक्तिगत नहीं है ये सिर्फ़ सच और झूठ की लड़ाई है और जब तक सच की जीत नहीं हो जाती वो अपनी ये लड़ाई अपने साथियों के साथ मिलकर जारी रखेंगे। धारूहेड़ा की आमजनता भी चाहती है कि सच बाहर आए।




