करवा चौथ : रेवाड़ी में देखें करीब कितने बजे दिख सकता है चांद!

करवा चौथ पर शुभ योग : ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस वर्ष करवा चौथ के पर्व पर योग भी ज्यादा खास बन रहे हैं। ज्योतिषीय गणना अनुसार 5 वर्षों के बाद शुभ योग बन रहा है। रविवार को होने से सूर्य भगवान व्यक्ति को आयु, आरोग्य व सौभाग्य की प्राप्ति, करवा चौथ का व्रत, रोहिणी नक्षत्र में पूजा कि जाएगी और रोहिणी नक्षत्र 27 नक्षत्रों में सभी से सुंदर व चंद्रमा का प्यारा नक्षत्र होने से इस बार करवाचौथ सौभाग्य के लिए विशेष सुखदायी माना जाता है। रोहिणी नक्षत्र में ही चंद्रोदय रेवाड़ी समयानुसार रात 8.10 पर चंद्रोदय होगा। करवा चौथ पूजा मुहूर्त शाम 5.45 से 6.53 तक होगा।
करवा चौथ व्रत कथा:
पौराणिक कथा के अनुसार, इंद्रप्रस्थपुर में एक ब्राह्मण रहता था, उसके साथ पुत्र और एक वीरावती नाम की पुत्री थी. इकलौती पुत्री होने के कारण वे सभी की लाडली थी. ब्राह्मण ने अपनी बेटी का विवाह एक ब्राह्मण युवक से कर दिया था. शादी के बाद वीरावती पहली करवाचौथ पर मायके आई हुई थी. उसने पति की लंबी उम्र के लिए मायके में ही व्रत रख लिया. वीरावती भूख-प्यास बर्दाश्त नहीं कर सकी और मूर्छित होकर गिर गई. भाइयों से बहन की ऐसी हालत देखी नहीं गई.
बहन की हालत देख भाइयों ने उसका व्रत खुलवाने की सोची. उन्होंने एक दीपक जलाकर पेड़ के पीछे छलनी में रख दिया. और बहन को बोला की चांद निकल आया है. वीरावती ने छत पर जाकर चंद्र दर्शन किए और पूजा पाठ करने के बाद नीचे आकर खाना खाने बैठ गई. वीरावती के भोजन शुरू करते ही पहले कौर में बाल आया, दूसरे में छींक आ गई और तीसरे कौर में उसे अपने ससुराल से निमंत्रण आ गया. ससुराल का निमंत्रण पाते ही वीरावती भागी-भागी वहां पहुंची. वहां जाते ही उसने देखा कि उसका पति मृत है. पति को इस हालत में देख वो व्याकुल होकर रोने लगी.
वीरावती की ऐसी हालत देखर इंद्र देवता की पत्नी देवी इंद्राणी उसे सांत्वना देने वहां पहुंच गई और उसे उसकी भूल का आहसास दिलाया. इतना ही नहीं. उन्होंने वीरवती को करवाचौथ के साथ-साथ पूरे साल आने वाली चौथ के व्रत रखने की सलाह दी. वीरवती ने ऐसा ही किया और व्रत के पुण्य से उसकी पति को फिर से जीवनदान मिल गया.
पूजा करने का तरीका: शास्त्री के अनुसार करवा चौथ पर पूजा भी विधि अनुसार करनी चाहिए। जैसे सुहाग का सामान, चुनरी, छलनी, मिट्टी का बर्तन, गंगाजल, कुमकुम, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, मीठा, कच्चा दूध, घी, चांद निकलने के पहले सारा सामान थाली में रख लें और फिर चांद निकलने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व छलनी से पति का मुख देखकर व्रत खोलें।
पूर्व संध्या पर खरीदारी व मेहंदी लगवाने की होड़ : इस पर्व की पूर्व संध्या पर महिलाओं की ओर से मेहंदी लगवाने की होड़ रही। शहर के पंजाबी मार्केट में अन्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा भीड़ रही। महिलाओं ने कंगन से लेकर कपड़े और साड़ियां भी खरीदी। इसके अलावा मेहंदी लगवाने वालों के यहां भी भीड़ रही। कई महिलाओं ने मेहंदी के दौरान हाथ पर अपने पति का नाम भी लिखवाया




