रेवाड़ी
अहीर रेजीमेंट हमारा हक है और इसे हम लेकर रहेगें : विधायक चिरंजीव

रेवाडी। भारतीय सेना में अहीर रेजीमेंट गठन को लेकर गांव धामलावास में भूख हडताल एवं धरने पर बैठे लोगोंं को धरना स्थल पंहूचकर रेवाडी विधायक चिरंजीव राव ने अपना समर्थन देते हुए कहा कि अहीर रेजीमेंट हमारा हक है और इसे हम लेकर रहेगें। अहीर समाज की यह 125 साल पुरानी मांग है और यह मांग समय-समय पर उठती भी रही है। लेकिन हमें जरूरत है कि पूरे देश से एक साथ यह मांग उठे। अब समय है कि सभी एक होकर इस मुहिम में जुटें। चिरंजीव राव ने बताया कि कांग्रेस ओबीसी सैल के राष्ट्रीय चेयरमैन पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव ने चेयरमैन का पदभार संभालने के बाद लगभग 6 राज्यों को दौरा किया है और वहां पर भी अहीर रेजीमेंट की मांग को जोर शोर से उठाया है। वहीं राजस्थान के उदयपुर में होने वाले कांग्रेस पार्टी के चिंतन शिविर में भी कैप्टन अजय सिंह यादव अहीर रेजीमेंट बनवाने की मांग को उठाएगें। राव ने बताया कि उन्होंने तो अहीर रेजीमेंट बनवाने को लेकर हस्ताक्षर अभियान भी चलाया था और हरियाणा विधानसभा में भी मामला उठाया कि हरियाणा सरकार को अहीर रेजीमेंट बनवाने की सिफारिश कर एक रेजुलेशन केंद्र सरकार को सौंपना चाहिए।
विधायक चिरंजीव राव ने कहा अहीर रेजीमेंट बनने से युवाओं को रोजगार मिलेगा। कौम को अलग से पहचान और सम्मान मिलेगा। कौम के बहाए गए खून को वीरोचित सम्मान मिलता है। देश की कुलजनसंख्या के लगभग 20 प्रतिशत अहीर समाज से हैं और 1857 की क्रांति में राव गोपाल देव और राव तुलाराम के नेतृत्व में अंग्रेजों के दांत खट्टे किए थे। इसके अलावा प्रथम विश्व युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध, नसीबपुर का युद्ध के अलावा रेजागंला युद्ध हो या फिर संसद पर हम्ला हो, अक्षरधाम पर हम्ला सभी में अहीरों ने शहादत दी है। इतनी शहादत देने के बाद भी आज तक अहीर रेजीमेंट नही बनाई गई है। इसलिए अब सभी एक होकर अहीर रेजीमेंट बनाने के लिए प्रयास करें।उन्होंने बताया कि अंग्रेजों के हराने में अहीरों को अहम योगदान रहा था इसलिए अंग्रेजों ने अहीर रेजीमेंट को नही बनने दिया था। लेकिन अब इस मुहिम को देश भर में फैलाया जाएगा। देश के सभी राजनीतिक और गैरराजनितिक संगठनों से भी सहयोग मांगा जाएगा। क्योंकि यह किसी व्यक्ति विशेष का कार्य न होकर सर्व समाज का है। इसलिए सभी राजनीतिक पाटियों के नेताओं व समाजिक संगठनों को एक होकर एक रेजुलेशन पास करके महामहिम राष्ट्रपति के पास सौंपना चाहिए।




