रेवाड़ी

तस्वीर देखकर घबराईये नही, आप अहीरवाल की लंदन रेवाड़ी का नजारा देख रहे है

आमजन की समस्याओं से न जनप्रतिनिधियों को कोई सरोकार न अफसरशाही को परवाह

रेवाड़ी शहर व गांवों की सडक़ों की हालत खस्ता, जिम्मेदार कौन?
रेवाड़ी। जब रेवाड़ी जिले को महिमामंडित करने की बारी आती है तो इसे कभी अहीरवाल की लंदन तो कभी पीतल नगर नगरी का तगमा देकर हर कोई आगे आकर इसकी ऐतिहासिकता का परिचय कराने के लिए आतुर नजर आता है, किन्तु जब-जब रेवाड़ी में पसरी अव्यवस्थाओं की जिम्मेदारी लेने अथवा तय करने की बारी आती है तो दूर-दूर तक कोई नजर नही आता है। आज रेवाड़ी शहर व आसपास के गांवों में शायद ही ऐसा कोई सडक़ मार्ग बचा हो जिसे देखकर रेवाड़ी की ऐतिहासिकता अथवा कथित विकास पर इतराया जा सके। शहर में लगभग सभी सडक़ मार्ग इस कदर क्षतिग्रस्त हो चुके है कि यहां पर खड़ा हुआ बरसाती पानी जोहड़ का एहसास करा देता है। रेवाड़ी को अन्य मुख्य मार्गो से जोडऩे वाला दिल्ली रोड़, सरकुलर रोड़, बावल रोड़, पटौदी रोड़, झज्जर रोड़ सभी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके है। जो लोग पूर्व में यह कहते नही थकते थे कि बीजेपी सरकार में सडक़ मार्ग चकाचक हो जाते है और सबसे ज्यादा ध्यान सडक़ों का रखा जा जाता है, अब वे ही लोग सडक़ों की हालत को लेकर बीजेपी सरकार की जमकर आलोचना कर रहे है। मोनसून की बरसात से पहले जो सडक़ मार्ग चकाचक नजर आ रहे थे, उनमें अब बरसाती पानी के कारण बड़े-बड़े गड्डे बन चुके है जिन्हे भरने वाला कोई नही है।
ऐसा भी नही है कि शहर को जोडऩे वाले सडक़ मार्ग ही खस्ता हालत में है। गांवों से गुजरने वाली सडक़े की हालत तो और भी दयनीय है। किसान आंदोलन के कारण हाईवे का सारा टै्रफिक गांवों से जुड़े सडक़ मार्ग से गुजर रहा है, जिस कारण गांवों में बनी सडक़ों की तस्वीर शहरी सडक़ की तुलना में कहीं अधिक भयानाक हो चुकी है। भाड़ावास रोड़ इसकी बानगी है जहां लोग एक ओर हैवी ट्रैफिक से दुखी है तो वहीं सडक़ मार्ग खस्ता होने के कारण सदैव हादसे का डर बना रहता है। दक्षिणी हरियाणा में किसान आंदोलन की सक्रियता लगभग न के बराबर है, जिसे लेकर नेता विशेष इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोडक़र समय-समय पर अपनी छाती भी ठाकते नजर आते है। किन्तु अब ग्रामीण कहने लगे है कि सरकार को न तो किसानों की मांग से कोई सरोकार है और शायद न ही आम जनता की परेशानियों की कोई परवाह है। तभी तो एनएच 8 पर किसान लम्बे समय से धरना दे रहे है जिनकी सरकार सुन नही रही है और न ही यहां के लोगों की पीड़ा को समझ पा रही है जो खस्ता सडक़ मार्ग को दुरूस्त करने की मांग प्रशासन के सामने उठाते है।
जनप्रतिनिधि नदारद, अधिकारी बेपरवाह, सडक़ों की बिगड़ी हालत को लेकर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि आज तक एक्शन मोड में नजर नही आये है और यह हालत तो तब है, जब रेवाड़ी जिले से सम्बन्धित एक भाजपा नेता केन्द्र में तो दूसरा राज्य सरकार में मंत्री है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के गैरजिम्मेदार रवैये को देखकर ऐसा लगता है कि आमजन को बिजली, पानी, सडक़, ईलाज आदि से सम्बन्धित सुविधा उपलब्ध करवाना न तो उनकी जिम्मेदारी है और न ही यह उनकी प्राथमिकता में शामिल है। यहीं वजह है कि यहां के अधिकारी भी इन समस्याओं को लेकर इस कदर बेपरवाह हो चुके है कि चाहे ऐसी समस्याओं को लेकर आमजन ज्ञापन सौंपे या ये रोज मीडिया की सुर्खिया बने, उनकी सेहत पर कोई असर नही पड़ता है। यह इसी की बानगी है कि सडक़े लगातार खस्ता होती जा रही है और अधिकारी अपनी टीम के साथ एक दिन बरसाती पानी में खड़े होकर मीडिया सुर्खिया बनने के बाद समस्या को समय पर छोड़ देते है।
KOMAL

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