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रेवाड़ी की पहली Paid Parking पर बवाल, व्यापारियों और आमजन में रोष

रेवाडी। नगर परिषद रेवाडी द्वारा शहर में विभिन्न जगहों पर बनाई जा रही पार्किंग का विरोध दिन प्रतिदिन बढता जा रहा है। पार्किंग को लेकर व्यापारियों और आमजन में काफी रोष है, इसी मामले को लेकर व्यापारियों ने पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव के पास पंहूचकर सारी जानकारी दी है और कैप्टन अजय सिंह ने जिला उपायुक्त यशेंद्र सिंह से इस बारे में बात करते हुए कहा कि कम से कम दुकानदारों से पार्किंग शुल्क न वसूला जाए। यादव ने मीडिया के नाम जारी ब्यान में कहा कि नगर परिषद द्वारा बनाई जा रही पार्किंग शुल्क जो रखा गया है वह बहूत ही ज्यादा है। वहीं कुछ दुकानदारों ने मुझे बताया कि जैसे ब्रास मार्केट के जो दुकानदार हैं उन्होंने करोडों रूपये में दुकाने खरीदी हैं या फिर बहूत से लाखों रूपये दुकान का किराया दे रहे हैं वहां पर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने दुकानों के साथ पार्किंग स्पेश भी छोडा हुआ है तो वहां किस बात का पार्किंग शुल्क नगर परिषद द्वारा लिया जा रहा है। वहीं भारी भरकम पार्किंग शुल्क रखा हुआ है एसे में ग्राहकों को भी दिक्कत आएगी। नगर परिषद द्वारा नगर परिषद की खाली जगह पर पार्किंग बनाना चाहिए ताकि शहर में जाम से निजात मिल सके।
कैप्टन अजय सिंह यादव ने कहा कि नगर परिषद को जो कार्य करने चाहिए उस तरफ तो उनका ध्यान नही है दूसरी तरफ आमजन व व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है। नगर परिषद के चेयरमैन के चुनाव को एक साल पूरा हो चुका है। चुनाव के समय में भाजपा नेताओं ने बडे लंबे चौडे वायदे जनता से किए थे कि रेवाडी शहर को चका चौंध कर देंगें। लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी रेवाडी शहर में हाल ज्यों के त्यों हैं। आज भी शहर में जाम की समस्या, कालोनियों में पानी शिविर की समस्या, स्ट्रीट लाईट की समस्या, आवारा पशु की समस्या, कुडे की समस्या, लोगों की प्रोपर्डी आई बनाने में भष्ट्राचार का बोलबाला है इत्यादि समस्या ज्यों की त्यों हैं। इसलिए मेरी सलाह है कि नगर परिषद को ऐसे काम करने चाहिए जिससे लोगों का भला हो सके न कि ऐसे निणर्य लें जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पडे।
कैप्टन अजय सिंह ने कहा कि परिवार पहचान पत्र बनवाने में भी लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड रहा है। लोगों को काफी चक्कर काटने पड रहे हैं इसको बनाने में भी भष्ट्राचार किया जा रहा है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को इसमें संज्ञान लेना चाहिए और परिवार पहचान पत्र बनाने में पारदर्शिता लानी चाहिए।
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