
कलम की धार – पिछले लगभग ….. दिनों से शाहजहांपुर बार्डर पर हाईवे पर किसान सड़क जाम करके कृषि कानून के खिलाफ अपना विरोध जताने के लिए धरने पर बैठे है। किसानों द्वारा एक ओर की सड़क जाम करने के कारण एनएच-8 से गुजरने वाले वाहन आसपास के गांवों से होकर अपने गंतव्य की ओर जा रहे है। इन वाहनों मे भारी मालवाहक ट्रक, डम्पर आदि बड़ी संख्या मे गांवों के स्थानीय मार्ग से होकर गुजर रहे है, जिस कारण गांवों में बनी सड़के खस्ताहाल हो चुकी है। सड़कों की हालत देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि ये सड़क नही बल्कि राहगीरों के लिए अब मौत का रास्ता बन चुकीहै। रेवाड़ी से शाहजहांपुर को जोड़ने वाले भाड़ावास रोड़ की ओवरलोड वाहनों के लगातार आवागमन के कारण हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि यहां से पैदल गुजरना भी अब खतरे से खाली नही। सड़कों में इतने बड़े-बड़े गड्डे बन चुके जो कभी भी
किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते है। इन गड्डों के कारण खुद ओवरलोड वाहन चालको व स्थानीय लोगों के पसीने छूट रहे है। गौर करने लायक बात यह है कि भाड़ावास रोड़ पर पड़ने वाले गांव लगभग सड़क से सटे हुए है। ऐसी स्थिति में कभी भी सड़क दुर्घटना के कारण जनहानि हो सकती है। ऐसा भी नही है कि बिगड़ती सड़कों को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन की कुंभकरणी नींद खोलने का प्रयास नही किया हो। ग्रामीणों द्वारा प्रशासन को अपनी चिंताओं से अवगत करवाने के बावजूद भी आज तक इस रोड़ को दुरूस्त करने की जहमत तक नही उठाई गई है।
वैसे तो प्रशासन सड़क सुरक्षा सप्ताह के माध्यम से लोगों को सुरक्षित रहने के लिए ज्ञान बाटता है, किन्तु खुद सड़कों की बिगड़ती स्थिति की सुध लेने को तैयार नही। जब सड़के ही ठीक नही होगी तो इन पर सुरक्षित यात्रा कैसे हो पायेगी, यह बात समझ से परे है। सुरक्षित सड़क मार्ग को लेकर प्रशासन कितना सतर्क है, इस आभास इसी से होता है कि भाड़ावास फाटक पर दोनो ओर सड़क पर बड़े-बड़े गड्डे बन चुके है और रही-सही कसर सड़क के दोनो ओर बने बड़े-बड़े ब्रेकरों ने पूरी कर दी है। हालत यह है कि जब-जब वाहन विशेषकर ओवरलोड वाहन इन ब्रेकरों से गुजरते है, सदैव उनके दुर्घटनाग्रस्त होने की आंशका बनी रहती है। इस फाटक पर रोजना दिनभर जाम आम बात है। कई-कई बार तो वाहनों की दो-दो किलोमीटर तक लम्बी लाईने लग जाती है।
जैसे-जैसे सड़कों की हालत बिगड़ती जा रही है, वैसे-वैसे ग्रामीणों में सरकार व प्रशासन के प्रति गुस्सा व रोष भी पनपता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र मे अब तंज कसा जाने लगा है कि वैसे तो सरकार सबका साथ-सबका विकास का नारा देती है लेकिन आमजन की समस्याओं को लेकर प्रशासन जिस तरह से उदासीन है, उसे देखकर ऐसा लगता है कि न तो सरकार और न ही उसके प्रशासन को नागरिकों की कोई चिंता है। कहीं ऐसा न हो एक ओर कृषि कानूनों के विरोध मे किसानो ने सरकार का बायकाट किया हुआ है तो वहीं दूसरी ओर दक्षिणी हरियाणा मे बदहाली के कारण ग्रामीण स्थानीय नेताओं का बहिष्कार करना शुरू न कर दे।




